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SEBI ने डिजिटल गोल्ड स्कीम्स पर चेतावनी जारी की — निवेश से पहले जानें बड़ा खतरा

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mohammad Hamid

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10 Nov 2025 | NewsInTick


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सोने की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर "डिजिटल गोल्ड" या "ई‑गोल्ड" उत्पादों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। लेकिन भारतीय निवेश नियामक SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने 8 नवंबर 2025 को निवेशकों को सतर्क करते हुए कहा है कि कई ऐसे डिजिटल गोल्ड विकल्प SEBI के रेगुलेटरी Framework के बाहर हैं और इनमें निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

SEBI ने क्या कहा?


Regulator ने साफ़ किया कि कई प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स को न तो "सिक्योरिटी" के रूप में Notified किया गया है और न ही वे Commodity Derivatives के अंतर्गत आते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इन पर SEBI का सीधा नियंत्रण नहीं है और न ही निवेशकों को वही स्तर की सुरक्षा मिलती है जो रेगुलेटेड निवेश उत्पादों में होती है।


डिजिटल गोल्ड — समझें बेसिक मॉडल


डिजिटल गोल्ड में उपयोगकर्ता ऑनलाइन कुछ रुपये से सोने का हिस्सा खरीद लेते हैं और प्लेटफॉर्म दावा करता है कि ये यूनिट किसी वॉल्ट में भौतिक रूप से सुरक्षित रखी जाती हैं। कुछ प्लेटफॉर्म फिजिकल डिलीवरी का विकल्प भी देते हैं, जबकि अन्य केवल डिजिटल यूनिट्स की अदला‑बदली की सुविधा प्रदान करते हैं।


मुख्य जोखिम


SEBI की सलाह: निवेशक डिजिटल गोल्ड में होने वाले Offers को बिना पूरी जाँच‑परख के न लें। ऐसे Products में निवेश करने से पहले कंपनी के मालिकाना ढांचे, Audit reports (वो दस्तावेज जो किसी कंपनी या संस्था के वित्तीय खातों (financial accounts) और कामकाज की जांच (audit) के बाद बनाए जाते हैं।), Walt Record (किसी बैंक या प्लेटफ़ॉर्म के सेफ वॉल्ट (तिजोरी) में रखे गए सोने या कीमती संपत्तियों का आधिकारिक रिकॉर्ड।) और Regulatory Status (किसी संस्था, कंपनी या प्रोडक्ट का सरकारी या कानूनी नियामक संस्था (जैसे SEBI, RBI) के नियमों के तहत रजिस्टर्ड और नियंत्रित होना या नहीं होना।) की पुष्टि करें।

कौन‑से विकल्प सुरक्षित माने जाते हैं?


SEBI ने सुझाव दिया है कि सोने में निवेश के लिए बेहतर और रेगुलेटेड विकल्पों पर विचार किया जाए जैसे:


वैश्विक संदर्भ और क्या देखें?


ग्लोबल मार्केट में गोल्ड की कीमतें भू‑राजनीतिक तनाव, डॉलर की चाल और Economic uncertainty से प्रभावित होती रहती हैं। इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड के भाव ऊँचे बने हुए हैं, जिससे घरेलू निवेशकों की रुचि बढ़ी है। ऐसे में बिना रेगुलेशन वाले डिजिटल ऑफर्स और भी अधिक जोखिम दिखा सकते हैं।


निष्कर्ष


डिजिटल गोल्ड सुविधाजनक और एक्सेसिबल हो सकता है, लेकिन जब तक वह किसी स्पष्ट रेगुलेटरी ढांचे में नहीं आता, तब तक निवेशकों के लिए उसकी सुरक्षा सीमित रहती है। SEBI की चेतावनी इसीलिए महत्वपूर्ण है — निवेश से पहले हमेशा स्रोत‑सिद्धि और रेगुलेटरी स्थिति की जाँच करें और संभव हो तो रेगुलेटेड विकल्पों को प्राथमिकता दें।